Thursday 20 September 2007

प्यार नफरत में बदल जाता है

भरोसे पर टिकती है दोस्ती
भरोसे से होते हैं दुनिया के सारे कम
प्यार भरोसे की देन हैं
भरोसे पर कायम हैं इंसानियत
सब जगह हैं भरोसे की नीव
जब टूटता है भरोसा
तो दोस्ती दुश्मनी में,
प्यार नफरत में बदल जाता है
इसी लिए कहता हूँ
कभी मत तोडना
किसी का भरोसा

3 comments:

deepanjali said...

आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

राजीव जैन said...

सही है
भरोसा कभी किसी का नहीं तोडना चाहिए
वैसे भी कहते हैं न कि दुनिया भरोसे पर चलती है
जिंदगी का ही भरोसा नहीं होता फिर भी हम किसी से जिंदगी भर साथ निभाने या कल आने जाने मिलने का वायदा कर देते हैं।

sarvesh said...

ashish ji,
ye sach hai ki bharose k sahaare duniya chal rahi hai, rishte chal rahe hain, insaniyat zinda hai...
lekin ab duniya me kafi badlaw aa rahaa hai..duniya me bharosa kam dikhawa jyada ho gaya hai..jis par sabse jyada bharosa kiya jae, wo sabse pahle bharosa torta hai..
lekin fir bhi antim sach yahi hai ki bharosa bade kaam ki chij hai..aur hame ise apne andar zinda rakhna hoga...
aap ke wichar achche hain, lekin inhe dushit mat kariyega...