Saturday 18 August 2007

तेरे लब पर अपना नाम चाहता हूँ

तेरी सांसों में
अपनी सांसों को खो देना चाहता हूँ
तेरे लब पर अपना नाम चाहता हूँ
तुझमे खो कर अपने को मिटा देना चाहता हूँ
बस एक बार अपने लबों पर मेरे नाम को आने दे
तेरे सीने पर काला तिल बनकर
मुझे अपने सीने से लग जाने दे
बस मुझे एक बार तेरी सांसों मे खो जाने दे

1 comments:

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना है।बधाई।